Saturday, 9 February 2019

हो गई बर्दास्त की अब इंतिहा...,,

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...

1.तुझे चाहु कितना ये ब्या कर नहीं सकता ।
तेरी बेरुखी को मैं अब सह नहीं सकता।
तु है मेरी जान मुझे है इतना यकीन,पर तुझसे अब दूरी बर्दास्त कर नहीं सकता ।

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