Monday, 15 November 2021

RAVINDERNATH TAGORE KI MASHUR KAVITAYE

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


रबीन्द्रनाथ टैगोर (१९२५)
स्थानीय नाम রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর
जन्म 07 मई 1861
कलकत्ता (अब कोलकाता), ब्रिटिश भारत[1]l
मृत्यु 07 अगस्त 1941
कलकत्ता, ब्रिटिश भारत[1]
व्यवसाय लेखक, कवि, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार
भाषा बांग्ला, अंग्रेजी
साहित्यिक आन्दोलन आधुनिकतावाद
उल्लेखनीय सम्मान साहित्य के लिए नोबल पुरस्कार
जीवनसाथी मृणालिनी देवी (१ मार्च १८७४–२३ नवंबर १९०२)
सन्तान ५ (जिनमें से दो का बाल्यावस्था में निधन हो गया)
सम्बन्धी टैगोर परिवार





रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताएं – Rabindranath Tagore Poems in Hindi
चल तू अकेला!

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला,
चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला!
तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला,
जब सबके मुंह पे पाश..
ओरे ओरे ओ अभागी! सबके मुंह पे पाश,
हर कोई मुंह मोड़के बैठे, हर कोई डर जाय!
तब भी तू दिल खोलके, अरे! जोश में आकर,
मनका गाना गूंज तू अकेला!
जब हर कोई वापस जाय..
ओरे ओरे ओ अभागी! हर कोई बापस जाय..
कानन-कूचकी बेला पर सब कोने में छिप जाय…
चुप-चुप रहना सखी

चुप-चुप रहना सखी, चुप-चुप ही रहना,
कांटा वो प्रेम का,छाती में बाँध उसे रखना!
तुमको है मिली सुधा, मिटी नहीं अब तक उसकी क्षूधा,
भर दोगी उसमे क्या विष! जलन अरे जिसकी सब बेधेगी मर्म,
उसे खिंच बाहर क्यों रखना!!
पिंजरे की चिड़िया थी

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कहानियाँ

पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में
वन कि चिड़िया थी वन में
एक दिन हुआ दोनों का सामना
क्या था विधाता के मन में

वन की चिड़िया कहे सुन पिंजरे की चिड़िया रे
वन में उड़ें दोनों मिलकर
पिंजरे की चिड़िया कहे वन की चिड़िया रे
पिंजरे में रहना बड़ा सुखकर

वन की चिड़िया कहे ना…
मैं पिंजरे में क़ैद रहूँ क्योंकर
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय
निकलूँ मैं कैसे पिंजरा तोड़कर

वन की चिड़िया गाए पिंजरे के बाहर बैठे
वन के मनोहर गीत
पिंजरे की चिड़िया गाए रटाए हुए जितने
दोहा और कविता के रीत

वन की चिड़िया कहे पिंजरे की चिड़िया से
गाओ तुम भी वनगीत
पिंजरे की चिड़िया कहे सुन वन की चिड़िया रे
कुछ दोहे तुम भी लो सीख

वन की चिड़िया कहे ना ….
तेरे सिखाए गीत मैं ना गाऊँ
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय!
मैं कैसे वनगीत गाऊँ

वन की चिड़िया कहे नभ का रंग है नीला
उड़ने में कहीं नहीं है बाधा
पिंजरे की चिड़िया कहे पिंजरा है सुरक्षित
रहना है सुखकर ज़्यादा

वन की चिड़िया कहे अपने को खोल दो
बादल के बीच, फिर देखो
पिंजरे की चिड़िया कहे अपने को बाँधकर
कोने में बैठो, फिर देखो
वन की चिड़िया कहे ना…
ऐसे मैं उड़ पाऊँ ना रे
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय
बैठूँ बादल में मैं कहाँ रे

ऐसे ही दोनों पाखी बातें करें रे मन की
पास फिर भी ना आ पाए रे
पिंजरे के अन्दर से स्पर्श करे रे मुख से
नीरव आँखे सब कुछ कहें रे

दोनों ही एक दूजे को समझ ना पाएँ रे
ना ख़ुद समझा पाएँ रे

दोनों अकेले ही पंख फड़फड़ाएँ
कातर कहे पास आओ रे

वन की चिड़िया कहे ना….
पिंजरे का द्वार हो जाएगा रुद्ध
पिंजरे की चिड़िया कहे हाय
मुझमे शक्ति नही है उडूँ ख़ुद
अनसुनी करके

अनसुनी करके तेरी बात
न दे जो कोई तेरा साथ
तो तुही कसकर अपनी कमर
अकेला बढ़ चल आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे।

देखकर तुझे मिलन की बेर
सभी जो लें अपने मुख फेर
न दो बातें भी कोई क रे
सभय हो तेरे आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे।

तो अकेला ही तू जी खोल
सुरीले मन मुरली के बोल
अकेला गा, अकेला सुन।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे।

जायँ जो तुझे अकेला छोड़
न देखें मुड़कर तेरी ओर
बोझ ले अपना जब बढ़ चले
गहन पथ में तू आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे।

तो तुही पथ के कण्टक क्रूर
अकेला कर भय-संशय दूर
पैर के छालों से कर चूर।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे।

और सुन तेरी करुण पुकार
अंधेरी पावस-निशि में द्वार
न खोलें ही न दिखावें दीप
न कोई भी जो जागे रे-
अरे ओ पथिक अभागे रे।

तो तुही वज्रानल में हाल
जलाकर अपना उर-कंकाल
अकेला जलता रह चिर काल।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला बढ़ चल आगे रे।
विपदाओं से रक्षा करो, यह न मेरी प्रार्थना

Rabindranath Tagore Poems in Hindi on Nature


विपदाओं से रक्षा करो-
यह न मेरी प्रार्थना,
यह करो : विपद् में न हो भय।
दुख से व्यथित मन को मेरे
भले न हो सांत्वना,
यह करो : दुख पर मिले विजय।
मिल सके न यदि सहारा,
अपना बल न करे किनारा; –
क्षति ही क्षति मिले जगत् में
मिले केवल वंचना,
मन में जगत् में न लगे क्षय।
करो तुम्हीं त्राण मेरा-
यह न मेरी प्रार्थना,
तरण शक्ति रहे अनामय।
भार भले कम न करो,
भले न दो सांत्वना,
यह करो : ढो सकूँ भार-वय।
सिर नवाकर झेलूँगा सुख,
पहचानूँगा तुम्हारा मुख,
मगर दुख-निशा में सारा
जग करे जब वंचना,
यह करो : तुममें न हो संशय।
रोना बेकार है

व्यर्थ है यह जलती अग्नि इच्छाओं की
सूर्य अपनी विश्रामगाह में जा चुका है
जंगल में धुंधलका है और आकाश मोहक है।
उदास आँखों से देखते आहिस्ता क़दमों से
दिन की विदाई के साथ
तारे उगे जा रहे हैं।

तुम्हारे दोनों हाथों को अपने हाथों में लेते हुए

और अपनी भूखी आँखों में तुम्हारी आँखों को
कैद करते हुए,
ढूँढते और रोते हुए, कि कहाँ हो तुम,
कहाँ ओ, कहाँ हो…
तुम्हारे भीतर छिपी
वह अनंत अग्नि कहाँ है…

जैसे गहन संध्याकाश को अकेला तारा अपने अनंत
रहस्यों के साथ स्वर्ग का प्रकाश, तुम्हारी आँखों में
काँप रहा है,जिसके अंतर में गहराते रहस्यों के बीच
वहाँ एक आत्मस्तंभ चमक रहा है।

अवाक एकटक यह सब देखता हूँ मैं
अपने भरे हृदय के साथ
अनंत गहराई में छलांग लगा देता हूँ,
अपना सर्वस्व खोता हुआ।
नहीं मांगता

Rabindranath Tagore Poems in Hindi on India


मेरा शीश नवा दो अपनी
चरण-धूल के तल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।

अपने को गौरव देने को
अपमानित करता अपने को,
घेर स्वयं को घूम-घूम कर
मरता हूं पल-पल में।

देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।
अपने कामों में न करूं मैं
आत्म-प्रचार प्रभो;
अपनी ही इच्छा मेरे
जीवन में पूर्ण करो।

मुझको अपनी चरम शांति दो
प्राणों में वह परम कांति हो
आप खड़े हो मुझे ओट दें
हृदय-कमल के दल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।
गर्मी की रातों में

गर्मी की रातों में
जैसे रहता है पूर्णिमा का चांद
तुम मेरे हृदय की शांति में निवास करोगी
आश्चर्य में डूबे मुझ पर
तुम्हारी उदास आंखें
निगाह रखेंगी
तुम्हारे घूंघट की छाया
मेरे हृदय पर टिकी रहेगी
गर्मी की रातों में पूरे चांद की तरह खिलती
तुम्हारी सांसें, उन्हें सुगंधित बनातीं
मरे स्वप्नों का पीछा करेंगी।
विविध वासनाएँ

Rabindranath Tagore Poems in Hindi on India


विविध वासनाएँ हैं मेरी प्रिय प्राणों से भी
वंचित कर उनसे तुमने की है रक्षा मेरी;
संचित कृपा कठोर तुम्हारी है मम जीवन में।
अनचाहे ही दान दिए हैं तुमने जो मुझको,
आसमान, आलोक, प्राण-तन-मन इतने सारे,
बना रहे हो मुझे योग्य उस महादान के ही,
अति इच्छाओं के संकट से त्राण दिला करके।
मैं तो कभी भूल जाता हूँ, पुनः कभी चलता,
लक्ष्य तुम्हारे पथ का धारण करके अन्तस् में,
निष्ठुर ! तुम मेरे सम्मुख हो हट जाया करते।
यह जो दया तुम्हारी है, वह जान रहा हूँ मैं;
मुझे फिराया करते हो अपना लेने को ही।
कर डालोगे इस जीवन को मिलन-योग्य अपने,
रक्षा कर मेरी अपूर्ण इच्छा के संकट से।।
मेरे प्यार की ख़ुशबू

मेरे प्यार की ख़ुशबू
वसंत के फूलों-सी
चारों ओर उठ रही है।
यह पुरानी धुनों की
याद दिला रही है
अचानक मेरे हृदय में
इच्छाओं की हरी पत्तियाँ
उगने लगी हैं

मेरा प्यार पास नहीं है
पर उसके स्पर्श मेरे केशों पर हैं
और उसकी आवाज़ अप्रैल के
सुहावने मैदानों से फुसफुसाती आ रही है ।
उसकी एकटक निगाह यहाँ के
आसमानों से मुझे देख रही है
पर उसकी आँखें कहाँ हैं
उसके चुंबन हवाओं में हैं
पर उसके होंठ कहाँ हैं …
होंगे कामयाब

Famous Poems of Rabindranath Tagore in Hindi

होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।
दिन पर दिन चले गए



दिन पर दिन चले गए पथ के किनारे।
गीतों पर गीत अरे रहता पसारे।।
बीतती नहीं बेला सुर मैं उठाता।
जोड़-जोड़ सपनों से उनको मैं गाता।।
दिन पर दिन जाते मैं बैठा एकाकी।
जोह रहा बाट अभी मिलना तो बाकी।।
चाहो क्या रुकूँ नहीं रहूँ सदा गाता।
करता जो प्रीत अरे व्यथा वही पाता।।

FAIZ AHMAD FAIZ KE MASHUR SHER
KUMAR VISHWAS KE MASHUR SHER


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Tuesday, 12 October 2021

ADA JAFRI KE FAMOUS SHER

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


इनका जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में 22 अगस्त 1924 में हुआ था। इनका बचपन का नाम अज़ीज़ जहान था। वे केवल तीन वर्स्ष की थी जब उन्के पिता, मौलवी बदरूल हसन की मृत्यु हो गयी थी और उनकी माँ ने उनका का पालन-पोषण किया। यह 12 वर्ष के उम्र में ही कविता बनाने लगीं। नुरून हसन जाफरी से लखनऊ में 29 जनवरी 1947 को शादी हो जाती है। शादी के बाद वह अपने पति के साथ लखनऊ से कराची चले जाते हैं। जहाँ नुरून अँग्रेजी और उर्दू समाचार पत्र में एक लेखक बन जाते हैं। 3 दिसम्बर 1995 को नुरून की मौत हो जाती है। इसके बाद वह कराची से टोरोंटो में चले जाती हैं। जहाँ वह उर्दू का प्रचार करती हैं।





हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है
कभी अख़बार पढ़ लेना कभी अख़बार हो जाना


इस क़दर तेज़ हवा के झोंके
शाख़ पर फूल खिला था शायद






आंसू जो रुका वो किश्त-ए-जां में
बारिश की मिसाल आ गया है


मिरा सुकूं भी मिरे आंसुओं के बस में था
ये मेहमां मिरी दुनिया निखारने आते






कुछ यादगार अपनी मगर छोड़ कर गईं
जाती रुतों का हाल दिलों की लगन सा है


सौ सौ तरह लिखा तो सही हर्फ़-ए-आरज़ू
इक हर्फ़-ए-आरज़ू ही मिरी इंतिहा है क्या






आलम ही और था जो शनासाइयों में था
जो दीप था निगाह की परछाइयों में था


तुम पास नहीं हो तो अजब हाल है दिल का
यूं जैसे मैं कुछ रख के कहीं भूल गई हूं






इस क़दर तेज़ हवा के झोंके
शाख़ पर फूल खिला था शायद


दिल के गुंजान रास्तों पे कहीं
तेरी आवाज़ और तू है अभी





Wednesday, 15 September 2021

DAAG DEHLVI KE MASHUR SHER

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...




नवाब मिर्जा खाँ 'दाग़' , उर्दू के प्रसिद्ध कवि थे। इनका जन्म सन् 1831 में दिल्ली में हुआ। इनके पिता शम्सुद्दीन खाँ नवाब लोहारू के भाई थे। जब दाग़ पाँच-छह वर्ष के थे तभी इनके पिता मर गए। इनकी माता ने बहादुर शाह "ज़फर" के पुत्र मिर्जा फखरू से विवाह कर लिया, तब यह भी दिल्ली में लाल किले में रहने लगे। यहाँ दाग़ को हर प्रकार की अच्छी शिक्षा मिली। यहाँ ये कविता करने लगे और जौक को गुरु बनाया। सन् 1856 में मिर्जा फखरू की मृत्यु हो गई और दूसरे ही वर्ष बलवा आरंभ हो गया, जिससे यह रामपुर चले गए। वहाँ युवराज नवाब कल्ब अली खाँ के आश्रय में रहने लगे। सन् 1887 ई. में नवाब की मृत्यु हो जाने पर ये रामपुर से दिल्ली चले आए। घूमते हुए दूसरे वर्ष हैदराबाद पहुँचे। पुन: निमंत्रित हो सन् 1890 ई. में दाग़ हैदराबाद गए और निज़ाम के कविता गुरु नियत हो गए। इन्हें यहाँ धन तथा सम्मान दोनों मिला और यहीं सन् 1905 ई. में फालिज से इनकी मृत्यु हुई। दाग़ शीलवान, विनम्र, विनोदी तथा स्पष्टवादी थे और सबसे प्रेमपूर्वक व्यवहार करते थे।

गुलजारे-दाग़, आफ्ताबे-दाग़, माहताबे-दाग़ तथा यादगारे-दाग़ इनके चार दीवान हैं, जो सभी प्रकाशित हो चुके हैं। 'फरियादे-दाग़', इनकी एक मसनवी (खंडकाव्य) है। इनकी शैली सरलता और सुगमता के कारण विशेष लोकप्रिय हुई। भाषा की स्वच्छता तथा प्रसाद गुण होने से इनकी कविता अधिक प्रचलित हुई पर इसका एक कारण यह भी है कि इनकी कविता कुछ सुरुचिपूर्ण भी है।




प्रेम के हर अंदाज को अपने शब्द देने वाले शायरों में दाग़ देहलवी का नाम महत्वपूर्ण है, प्रेम के हर रंग को उन्होंने अपनी शायरी में पिरोया।




1.ख़ुदा रखे मुहब्बत ने किये आबाद घर दोनों
मैं उनके दिल में रहता हूं वो मेरे दिल में रहते हैं

कोई नामो-निशां पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना
तख़ल्लुस दाग़ है और आशिकों के दिल में रहते हैं

सितम ही करना, जफ़ा ही करना, निगाहे-उल्फ़त कभी न करना


उर्दू कविता, ग़ज़ल के अमिट हस्ताक्षर दाग़ देहलवी ने रोमांटिक शायरी को नई ऊंचाई दी। भाषा की स्वच्छता तथा प्रसाद गुण होने से इनकी कविता अधिक प्रचलित हुई पर इसका एक कारण यह भी है कि इनकी कविता कुछ सुरुचिपूर्ण भी है।

ये मजा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती
न तुझे क़रार होता न मुझे क़रार होता

सितम ही करना, जफ़ा ही करना, निगाहे-उल्फ़त कभी न करना
तुम्हें कसम है हमारे सिर की, हमारे हक़ में कभी न करना

जलवे मेरी निगाह में कौनो मकां के हैं



एक समय तक जब तमाम शायर फ़ारसी में लिखना ही शायर होने की महत्वपूर्ण पहचान मानते थे तब दाग़ साहब ने अपने शायराने मिज़ाज को फ़ारसी जकड़बंदी मुक्त किया और उस समय की आम बोलचाल की भाषा उर्दू के आसान शब्दों में पिरोया था।

जलवे मेरी निगाह में कौनो मकां के हैं
मुझसे कहां छुपेंगे वो ऐसे कहां के हैं

राह पर उनको लगा लाये तो हैं बातों में
और खुल जाएंगे दो-चार मुलाकातों में

क्या जुदाई का असर है कि शबे तन्हाई



उस समय यह बहुत कठिन काम था लेकिन दाग़ ने न सिर्फ न चुनौतियों का सामना किया बल्कि उर्दू शायरी पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

क्या जुदाई का असर है कि शबे तन्हाई
तेरी तस्वीर से नहीं मिलती सूरत मेरी

लूटेंगी वो निगाहें हर कारवाने दिल को
जब तक चलेगा रस्ता ये रहजनी रहेगी

चाह की चितवन में आँख उस की शरमाई हुई


न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबां आते-आते

आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता


चाह की चितवन में आँख उस की शरमाई हुई
ताड़ ली मज्लिस में सब ने सख़्त रुस्वाई हुई

ख़बर सुन कर मेरे मरने की वो बोले रक़ीबों से


ख़बर सुन कर मेरे मरने की वो बोले रक़ीबों से
ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियाँ थीं मरने वाले में

तुम को चाहा तो ख़ता क्या है बता दो मुझ को
दूसरा कोई तो अपना सा दिखा दो मुझ को

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था

देखना हश्र में जब तुम पे मचल जाऊँगा
मैं भी क्या वादा तुम्हारा हूँ कि टल जाऊँगा

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YE BHI PADIYE :SHERO SHAYARI
                   KHAMOSH
                                                 EK GARIB BCHE KI HANSI



Thursday, 26 August 2021

DEEWANE MIR KE FAMOUS SHER...

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


ख़ुदा-ए-सुखन मोहम्मद तकी उर्फ मीर तकी "मीर" (1723 - 20 सितम्बर 1810) उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर थे। मीर को उर्दू के उस प्रचलन के लिए याद किया जाता है जिसमें फ़ारसी और हिन्दुस्तानी के शब्दों का अच्छा मिश्रण और सामंजस्य हो। अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह के हमलों से कटी-फटी दिल्ली को मीर तक़ी मीर ने अपनी आँखों से देखा था। इस त्रासदी की व्यथा उनकी रचनाओं मे दिखती है। अपनी ग़ज़लों के बारे में एक जगह उन्होने कहा था-


हमको शायर न कहो मीर कि साहिब हमने
दर्दो ग़म कितने किए जमा तो दीवान किया

जन्म :१७२३

मृत्यु :१८१०




दीवान-ए-मीर से ‘मीर तक़ी मीर’ के 10 बड़े शेर


मीर तक़ी मीर उर्दू और फ़ारसी के एक अज़ीम शाइर हैं, उन्हें ख़ुदा-ए-सुख़न कहा जाता है। पेश हैं दीवान-ए-मीर से कुछ चुनिंदा शेर

मिरे सलीके से, मेरी निभी मुहब्बत में
तमाम उम्र, मैं नाकामियों से काम लिया

कुछ नहीं सूझता हमें, उस बिन
शौक़ ने हमको बेहवास किया




देगी न चैन लज़्ज़त-ए-ज़ख़्म उस शिकार को
जो खा के तेरे हाथ की तलवार, जाएगा


उनने तो मुझको झूंटे भी न पूछा एक बार
मैंने उसे हज़ार जताया, तो क्या हुआ




दिल की वीरानी का क्या मज़्कूर
यह नगर सौ मरतबा लूटा गया


सख़्त काफ़िर था जिनने पहले मीर
मज़हब-ए-इश्क़ इख़्तियार किया




मह ने आ सामने, शब याद दिलाया था उसे
फिर वह ता सुब्ह मिरे जी से भुलाया न गया


गुल ने हरचन्द से कहा, बाग़ में रह, पर उस बिन
जी जो उचटा, तो किसी तरह लगाया न गया




शहर-ए-दिल आह अजब जाय थी, पर उसके गए
ऐसा उजड़ा कि किसी तरह बसाया न गया


गलियों में अब तलक तो, मज़्कूर है हमारा
अफ़सान-ए-मुहब्बत, मशहूर है हमारा




दिल्ली में आज भीख भी मिलती नहीं उन्हें
था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का


मेरे रोने की हक़ीक़त जिसमें थी
एक मुद्दत तक वह काग़ज नम रहा



रात हैरान हूं, कुछ चुप ही मुझे लग गयी मीर
दर्द-ए-पिन्हां थे बहुत, पर लब-ए-इज़हार न था


आए अगर बहार तो अब हम को क्या सबा
हमसे तो आशियां भी गया और चमन गया

ये भी पढ़िए :Faiz Ahamad Faiz ke Famous Sher

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Wednesday, 21 July 2021

AKBAR ALLAHBADI KE FAMOUS SHER

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...






नाम-अकबर अल्लाहाबादी
पूरा नाम-सैयद अकबर हुसैन
जन्म-16 नवंबर,1846
जन्म स्थान-बरा, अल्लाहाबाद,उत्तर प्रदेश,भारत
राष्ट्रीयता-भारतीय
धर्म-इस्लाम

वो चाहे ग़ज़ल हो या नज़्म हो या फिर शायरी की कोई भी विधा हो, अकबर इलाहाबादी का अपना ही एक अलग अन्दाज़ था। उर्दू में हास्य-व्यंग और मोहब्बत के लाज़वाब शायर थे और पेशे से इलाहाबाद में सेशन जज थे। पेश है अकबर इलाहाबादी के 20 चुनिंदा शेर-

अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा
जब ख़ुदा का सामना होगा तो देखा जाएगा

लोग कहते हैं कि बदनामी से बचना चाहिए
कह दो बे उसके जवानी का मज़ा मिलता नहीं

उन्हीं की बे-वफ़ाई का


उन्हीं की बे-वफ़ाई का ये है आठों-पहर सदमा
वही होते जो क़ाबू में तो फिर काहे को ग़म होता

इलाही कैसी कैसी सूरतें तू ने बनाई हैं
कि हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते
अरमान मिरे दिल के निकलने नहीं देते

होनी न चाहिए थी मोहब्बत मगर हुई


इश्क़-ए-बुताँ का दीन पे जो कुछ असर पड़े
अब तो निबाहना है जब इक काम कर पड़े

इस गुलिस्ताँ में बहुत कलियाँ मुझे तड़पा गईं
क्यूँ लगी थीं शाख़ में क्यूँ बे-खिले मुरझा गईं

होनी न चाहिए थी मोहब्बत मगर हुई
पड़ना न चाहिए था ग़ज़ब में मगर पड़े

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है


इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

साँस की तरकीब पर मिट्टी को प्यार आ ही गया
ख़ुद हुई क़ैद उस को सीने से लगाने के लिए

हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के...


हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के
हाँ ऐ निगाह-ए-शौक़ ज़रा देख-भाल के

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

मरना क़ुबूल है मगर उल्फ़त नहीं क़ुबूल
दिल तो न दूँगा आप को मैं जान लीजिए

दुनिया का तलबगार नहीं हूँ


दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है

जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया
अब ख़ुश्क-मिज़ाज आँखें भी हुईं दिल ने भी मचलना छोड़ दिया

हया से सर झुका लेना


हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना

हसीनों के गले से लगती है ज़ंजीर सोने की
नज़र आती है क्या चमकी हुई तक़दीर सोने की

किस नाज़ से कहते हैं वो झुँझला के शब-ए-वस्ल
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते




1.ham aah bhī karte haiñ to ho jaate haiñ badnām

vo qatl bhī karte haiñ to charchā nahīñ hotā



2.ishq nāzuk-mizāj hai behad

aql kā bojh uThā nahīñ saktā



3.duniyā meñ huuñ duniyā kā talabgār nahīñ huuñ

bāzār se guzrā huuñ ḳharīdār nahīñ huuñ



4.hayā se sar jhukā lenā adā se muskurā denā

hasīnoñ ko bhī kitnā sahl hai bijlī girā denā



5.jo kahā maiñ ne ki pyaar aatā hai mujh ko tum par

hañs ke kahne lagā aur aap ko aatā kyā hai




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Monday, 21 June 2021

WASIM BARELVI KE FAMOUS SHER

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


ज़ाहिद हसन (वसीम बरेलवी) एक प्रसिद्ध उर्दू शायर हैं जो बरेली (उप्र) के हैं। इनका जन्म ८ फ़रवरी १९४० को हुआ था। आजकल बरेली कालेज, बरेली (रुहेलखंड विश्वविद्यालय) में उर्दू विभाग में प्रोफ़ेसर हैं।







1. apne chehre se jo zāhir hai chhupā.eñ kaise
terī marzī ke mutābiq nazar aa.eñ kaise



2.jahāñ rahegā vahīñ raushnī luTā.egā
kisī charāġh kā apnā makāñ nahīñ hotā





3.dukh apnā agar ham ko batānā nahīñ aatā
tum ko bhī to andāza lagānā nahīñ aatā


4.āsmāñ itnī bulandī pe jo itrātā hai
bhuul jaatā hai zamīñ se hī nazar aatā hai


5.vo jhuuT bol rahā thā baḌe salīqe se
maiñ e'tibār na kartā to aur kyā kartā



6.tujhe paane kī koshish meñ kuchh itnā kho chukā huuñ maiñ
ki tū mil bhī agar jaa.e to ab milne kā ġham hogā


7.raat to vaqt kī pāband hai Dhal jā.egī
dekhnā ye hai charāġhoñ kā safar kitnā hai


1.ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहींतेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी
ग़म और होता सुन के
ग़म और होता सुन के गर आते न वो 'वसीम'
अच्छा है मेरे हाल की उन को ख़बर नहीं




2.जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता
जो मुझ में तुझ में
जो मुझ में तुझ में चला आ रहा है बरसों से
कहीं हयात इसी फ़ासले का नाम न हो





3.किसी ने रख दिए ममता-भरे दो हाथ क्या सर पर
मेरे अंदर कोई बच्चा बिलक कर रोने लगता है
किसी से कोई भी उम्मीद
किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ता निभाना किस क़दर आसान हो जाए




4.कुछ है कि जो घर दे नहीं पाता है किसी को
वर्ना कोई ऐसे तो सफ़र में नहीं रहता
उसी को जीने का हक़ है
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए





5.बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें
तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी
दुख अपना अगर
दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता
तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता




6.न पाने से किसी के है न कुछ खोने से मतलब है
ये दुनिया है इसे तो कुछ न कुछ होने से मतलब है
तुझे पाने की कोशिश में
तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूँ मैं
कि तू मिल भी अगर जाए तो अब मिलने का ग़म होगा


7.हर शख़्स दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ़
फिर ये भी चाहता है उसे रास्ता मिले
रात तो वक़्त की पाबंद है
रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएग
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है


#MUNAWARRANA #FAMOUSSHER #SHAYARI




















Monday, 7 June 2021

INVESTMENT

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...

हेलो दोस्तों कैसे है आप लोग मैं आपका दोस्त दीपक बंसल एक बार फिर आपके लिए लेके आया हूँ ! आपकी जरूरतों से संबंधित एक बहुत ही जरूरी मसला ! जो की आप लोग सोचते है की बिलकुल गैर जरूरी है !
आप लोग सोच रहे होंगे मैं पागल तो नहीं हो गया ! ऐसा कैसे हो सकता की जो चीज आपके लिए जरुरी है पर आप उसे गैर जरूरी समझते है !
इसका सीधा सा रिप्लाई है इंवेस्टमेंट एक ऐसी चीज जिसे आप करते अपने भविष्य के लिए है ! यानि ऐसे समय के लिए जब आपको उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो ! आपके बच्चों की शादी आपका बुढ़ापा ! बच्चो की पढ़ाई इन सबके लिए आप करते है ! इन्वेस्टमेंट ! इन्वेस्टमेंट करने के लिए जगह भी बहुत है ! पर क्या आप जब इन्वेस्टमेंट करते है ! उस समय कितना सोचते है इंवेस्टमेंट के बारे में ! आप खुद से ये सवाल जरूर कीजिये ! वास्तिविकता ये है की इन्वेस्टमेंट सिर्फ एक फॉर्मेलिटी की तरह आप कर देते है ! जबकि आपकी प्रेजेंट इनकम से भी बड़ा पार्ट आपको आपका इन्वेस्टमेंट कमा के दे सकता है ! पर आपके पास इन सबके लिए समय कहा ! आपको किसी ने जबरदस्ती अगर fd करा दी तो आप वो कर लेते है ! किसी ने म्यूच्यूअल फण्ड और किसी ने कोई जमींन दिला दी तो वो !
जबकि कभी आपने अपने दिमाग़ से सोचा आपको आपका पैसा कहा लगाना चाइये !
जो लोग fd करते है उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड समझ नहीं आता ! जिन्हे म्यूच्यूअल फण्ड समझ आता है ! उन्हें fd समझ नहीं आता ! जबकि इतनी बार आपको बताया जाता है की आपका पूरा इन्वेस्टमेंट कभी एक  जगह नहीं होना चाइये !
फिर भी लोग वही गलती करते है ! और क्या आपको पता है अगर आपको एक जगह नहीं रखना तो कहा रखना है ! आपके पास हर तरह का इंवेस्टमेंट होना चाइये ! fd ,म्यूच्यूअल फण्ड, गोल्ड बांड realestate .पर अब कहा कितना रखना है ! ये कैसे समझे सबका अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से रेश्यो बनानां चाइये ! इसके लिए कई फैक्टर जैसे की ऐज ,आपकी जरूरते सब पर निर्भर करता है ! जैसे की अगर मेरी आयु २२ साल है तो मुझे मेरे पैसे का बड़ा हिस्सा म्यूच्यूअल फण्ड,स्टॉक मार्केट  और रियल एस्टेट में लगाना चाइये और वही अगर मेरी आयु ६० प्लस है तो मुझे मेरा मैक्सिमम पैसा fd या गोल्ड, में रखना चाइये ! बाकि अगर आप मुझे अपनी जरूरत बताये तो में आपको बता सकता हूँ आपको कहा कितना पैसा रखना है !  तो आप किसी भी तरह की मदद के लिए मुझसे डायरेक्ट मेरे कांटेक्ट  no.+91  9549522228  पर   संपर्क कर सकते है ! 


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Friday, 28 May 2021

YOUR LIFE YOUR DECISION...(your family suffer or not)

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...

हेलो दोस्तों आज मैं आपका दोस्त दीपक बंसल आपके लिए आपकी लाइफ के लिए इम्पोर्टेन्ट टॉपिक पर ये आर्टिकल लेकर  आया हूँ ! जो मुझे इस कोरोना  काल में महसूस हुआ की हम इंडियंस या भारतीय कुछ ज्यादा ही भगवान भरोसे है ! जबकि हम भूल जाते है की भगवान भी उन्ही की मदद करता है ! जो खुद अपनी मदद करते है !
इस कोरोना  कितने ही परिवारों के सर से पिता,बेटे,बेटी,माँ, बहन का साया छिन लिया ! जिनकी क्षतिपूर्ति तो कोई नहीं कर सकता ! पर उनके जाने के बाद जो सिर्फ अकेले ही पुरे परिवार  का सहारा थे ! जब वो नहीं रहे तो उस परिवार पर क्या गुजरती है ! आर्थिक रूप से   परिवार पूरा टूट जाता है ! देनदारियां , घर का खर्चा ,बच्चों की पढ़ाई  लोन की किस्तें , और उनके इलाज में लगे खर्चे से पूरा परिवार टूट जाता है !इन सवालो के जवाब किसी  के पास नहीं है और न तो कोई रिश्तेदार आपके काम आता है !  न ही कोई दोस्त काम आता है ! काम आता है तो आपके दवारा लिया गया डिसिशन जो आपने उस समय लिया जब आपको कोई एडवाइजर टर्म प्लान और हेल्थ insurance लेके आपके पास आया और उसे आपने क्या रेस्पॉन्स दिया जिन्होंने लिया !उनके परिवार आज भी आर्थिक रूप से सबल है ! और हर कार्य को कर पा रहे है ! जिन्होंने नहीं लिया उनका परिवार उनके जाने के बाद उनके जाने से ज्यादा आर्थिक रूप से टूट जाने से दुखी है ! इंसान की क्षतिपूर्ति कोई नहीं कर सकता पर जब जिम्मेदारियाँ बड़ी हो तो इंसान के जाने का दुःख और बड़ जाता है ! जब आप है तब एक छोटा सा अमाउंट insurance कंपनी को देना आपको अगर बेफिजूल खर्चा लगता है तो सिर्फ एक बार उस परिवार से मिलिए जिन्होंने अपने उस व्यक्ति को  खो दिया जो उनके परिवार का एक मात्र जरिया था कमाई का और उनके पास किसी तरह का हेल्थ और टर्म इन्शुरन्स नहीं था ! और दुर्भाग्य की बात है की  भारत जैसे देश में लोगो की जागरूकता आज भी इसे लेकर कम है !
मेरा मकसद आप लोगो में टर्म और हेल्थ इन्शुरन्स के प्रति जागरूकता लाना है ! आप एक बार इस पर विचार अवश्य करियेगा तब तक के लिए अलविदा फिर मिलेंगे किसी नए आर्टिकल के साथ !

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YE BHI PADIYE:SARKAR KE BS KA NHI AB CORONA
KUMAR VISHWAS SHAYARI IN HINDI!


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Tuesday, 11 May 2021

SARKAR KE BS KA NHI AB CORONA

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...

नमस्कार दोस्तों में आपका दोस्त दीपक बंसल एक बार फिर सरकारी मुद्दों पर आपके लिए नया आर्टिकल लेके आया हूँ ! 

दोस्तों जैसा की सभी को पता है की इस बार की कोरोना की लहर ने हमसे हमारे कई अजीज दोस्त छीन लिए कई परिवार बेसहारा हो गए ! किसी का भाई किसी की बहिन किसी के पिता किसी की माँ न जाने कितने ही लोगो को इस महामारी ने छीन लिया ! और अभी भी खतरा टला नहीं ! मैं  जो  यह  सब लिख रहा हूँ ! कल मैं भी रहु या न रहु किसी को नहीं पता ! लेकिन इन सबके बीच एक अछि चीज क्या है ! आपको पता है ! उम्मीद एक ऐसी उम्मीद जो बड़ी से बड़ी परेशानी में भी आपको जीने का रास्ता दिखाती है ! और हम तो वैसे भी टिपिकल इंडियन है जो 10TH के बैट्समैन से भी उम्मीद करते है की वो जीता देगा ! तो फिर आज हम उस उम्मीद को क्यों छोड़ रहे है ! हर कोई डरा हुआ है ! डरना लाजमी है ! पर आप मुझे बताये डरने से सिर्फ अपने शरीर और दिमाग़ को मारने के अलावा आप क्या  कर रहे है !






डर एक ऐसी चीज है जो  दुनिया में 90 % सांपो में जहर नहीं होने के बाद भी आदमी  सांप के काटने के डर  से मर जाता है ! और इसी तरह का काम कोरोना में भी हो रहा है ! PRECAUTION लेना समझदारी है ! और डरना बेवकूफी अगर आप डरते रहेंगे तो आप जीने से पहले जीने का साथ छोड़ देंगे ! मेरे कई मित्र और कई रिश्तेदार यहां तक  की मेरी अपनी बहन इस बीमारी से जूझ रही थी तो  मुझे उन सबमे एक कॉमन चीज दिखी डर ! एक तो सबसे बड़ा फर्क जो लोग समझदारी और डर के बीच समझ नहीं पाते ! कुछ लोग PRECAUTION लेने को डर मानते है ! जबकि ये दोनों चीजे अलग अलग है !

एक चीज जो आप अपने दिल को समझाये की आप सिर्फ PRECAUTION ले बाकि सब ऊपर वाले अपर छोड़ दे !सिर्फ आपके अकेले के साथ ऐसा नहीं हो रहा ! 150 करोड़ की आबादी इससे जूझ रही है ! और सरकार की तरफ मत देखिये अगर वो आपके बारे में सोचते तो आज इतनी बुरी स्थिती आती ही नहीं ! हमारा देश दुनिया का अकेला ऐसा देश होगा ! जहाँ पंचायत चुनाव भी आम लोगो की जान से ज्यादा कीमती है !  इस बुरे वक़्त में ये मत सोचिये कौन आपके बारे में क्या सोच रहा है ! आप आपकी नजर में सही होने चाइये !  सब हौसला रखे और डरे नहीं ! ये वक़्त भी गुजर जायगा ! जो गज दुरी मास्क है जरूरी ! आपका परिवार झेल लेंगे सब वार !


#Tribute to Corona warriors from different parts of the world



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Monday, 3 May 2021

CORONA KA HAHAKAR SARAKAR NE KIYA VISHWASHGHAT

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...

हेलो दोस्तों कैसे है आप सभी इस नकारात्मक दौर में मैं आपका दोस्त दीपक बंसल आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ ! और सरकारों के गैरजिमेदारना  रवैये पर फिर एक आर्टिकल लेकर आया हूँ !

दोस्तों कोरोना महामारी ने फिर एक बार हमारे सामने ऐसी िस्थति खड़ी कर दी है ! की घर के बहार जैसे कोई जॉम्बीज़ बैठे हो ! और वो हमे डरा रहे है ! पर फिर भी रोटी की वजह से लोग बहार जा रहे है ! मौत से दो हाथ कर रहे है ! पर क्या आपको नहीं लगता ये सब रुक सकता था ? हर आदमी को जीने का अधिकार था ? या हम सब सिर्फ वोट बैंक है ! जब भी देश में ऐसी परिस्थति आती है ! तो सबसे देश का सबसे कमजोर वर्ग इसका शिकार होता है ! तो फिर उस कमजोर वर्ग को क्यों धकेला गया ! इस आग में सिर्फ वोट बैंक के लिए ! 

मैं सिर्फ  मोदी ही नहीं गहलोत को भी इसके लिए दोषी मानता हूँ ! इतना बड़ा हुजुम इखट्टा किया अपनी शक्ति दिखाने और लोगो को मारने के लिए आज बंगाल की िस्थति इन लोगो ने इतनी बुरी कर दी की ! वहां वास्तिविक आकड़े बताये ही नहीं जा सकते कोरोना के ! लेकिन इन्हे क्या इन्हे तो वोट लेने है चाहए इनकी लाश से क्यों न लेने पड़े ! ऐसा ही हाल राजस्थान  में उपचुनाव में हुआ ! जिसका असर दिख रहा है ! उत्तराखंड में कुम्भ कराना जरूरी है ! २० लाख लोग कुम्भ नहीं जायेगे तो पृथ्वी पर प्रलय आ जायगा ! आज पृथ्वी का पता नहीं देश में तो आगया ! उसके बाद भी राजनीती बीजेपी राज्यों को सब सेवाएं अधिक और दूसरे राज्यों को कम ! क्यों भाई बाकि लोग इस देश के नहीं है क्या ! लोग मर रहे है पर राजनीती बा दस्तूर जारी है ! इन लोगो की राजनीती ने देश को कब्र पर ला खड़ा किया है ! अब इनका स्टेटमेंट आ  रहा है !जनता ने गलतिया की सब  बेपरवाह हो  गए ! हा हो गए पर जनता के पास गलत मैसेज पहुंचाया किसने की सब ठीक है ! आपकी रैलियों और धार्मिक आयोजनों ने ना ! जनता जो पहले इनकी बात सुनती थी वो भी नहीं सुन रही इन सबका एक ही कारन की इन लोगो ने जनता के साथ विश्वासघात किया ! 

परन्तु मैं एक बात कहना चाहता हूँ ! इन्होंने विश्वासघात किया ये लोग हमारा साथ भी नहीं दे रहे ! पर जान किसकी है ! सिर्फ एक यही सवाल आप खुद से कीजिये ! मानता हूँ कुछ लोगो का बहार निकलना जरूरी है उनके बिना हमारी सभी जरूरी सेवाय भी बंद हो जायगी और कईको रोजी रोटी के लिए जाना पड़ रहा है ! पर जो घर में रुक सकते है वो तो रुके ! बाकि अब खुद समझदार है ! 


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