Tuesday, 26 July 2022

HASRAT JAIPURI KE MASHUR SHER

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


हसरत जयपुरी के मशहूर शेर 



हसरत जयपुरी का जन्म जयपुर में इकबाल हुसैन के रूप में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी का अध्ययन बस शुरुआती स्तर तक ही किया था, और अपनी आगे की शिक्षा अपने नाना फिदा हुसैन "फिदा" से उर्दूऔर फारसी में ग्रहण की। जब वह लगभग बीस वर्ष के थे तब उन्होंने कविता लिखना शुरू किया था। उसी समय, उन्हें उनके पड़ोस में रहने वाली एक हिन्दु लड़की राधा से प्यार हो गया। हसरत ने इस लड़की को लिखे एक प्रेम पत्र के बारे में, एक साक्षात्कार में कहा कि प्रेम कोई धर्म नहीं जानता है। हसरत जयपुरी के हवाले से कहा गया, "यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि एक मुस्लिम लड़के को एक मुस्लिम लड़की से ही प्यार होना चाहिए। मेरा प्यार चुप था, लेकिन मैंने उसके लिए एक कविता लिखी थी, "ये मेरा प्रेमपत्र पढ़ कर, के तुम नाराज़ न होना” यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है कि प्रेम पत्र वास्तव में राधा को दिया गया था या नहीं। लेकिन अनुभवी फिल्म निर्माता राज कपूर ने इसे अपनी फिल्म संगम (1964 की हिंदी फिल्म) में शामिल किया और यह गीत पूरे भारत में 'हिट' हो गया।

शीर्षक गीत लिखने के लिए प्रसिद्ध हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल 1918 को हुआ था। इनका वास्तविक नाम इक़बाल हुसैन है। इनका करियर एक बस कंडक्टर के रूप में शुरू हुआ इसके बाद वह मुशायरों में भी शिरकत करने लगे। एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनको सुना और अपने बेटे राजकपूर से हसरत जयपुरी से मिलने की बात कही। और राज कपूर से मिलने के बाद उन्होंने 'बरसात' फ़िल्म का गाना 'जिया बेकरार है छाई बहार है आजा मोरे बालमा तेरा इंतज़ार है' लिखा तथा इस गाने की धुन शंकर जयकिशन ने बनायी। इस फ़िल्म से शंकर जयकिशन भी अपना कैरियर शुरू कर रहे थे। यह गाना बहुत हिट हुआ और इसके बाद हसरत साहब रुके नहीं। हसरत साहब ने फिल्मों में खूब गीत लिखे। गीतों के अलावा उन्होंने ग़ज़लें भी लिखी, शेर भी कहे। पेश कर रहे हैं हसरत जयपुरी के कुछ शेर-


दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ

वो सबा महकी महकी


ख़ुदा जाने किस-किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो सबा महकी महकी

हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं
वो ग़ैर की बांहों में आराम से सोते हैं

थाम तो लो मैं नशे में हूं


उस मैकदे की राह मे गिर जाऊं न कहीं
अब मेरा हाथ थाम तो लो मैं नशे में हूं

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियां अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं

नज़र से बचा कर चले गए


कहने को वो हसीन थे आंखें थीं बेवफ़ा
दामन मेरी नज़र से बचा कर चले गए

जाने क्यों तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन
चुटकियां लेती है क्यों सीने में मीठी सी चुभन

किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मेरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूं नहीं देते

किस वास्ते लिक्खा है


हम अश्क़ जुदाई के गिरने ही नहीं देते
बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं

किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते

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1 comment:


  1. Now The Time Maximum People Read This Type Of Article And This Will Also Create A Better Environment In The Human Atmosphere Which Ia A Good This For Us
    Read>>RAJDHANI NIGHT CHART
    Heart Touching Best Friend Shayari

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