Saturday, 9 January 2021

DIL SE DIL TAK SHAYARI

Shayar ki Kalam se dil ke Arman...


1.ग़ज़ल/gazal
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आँख में तूफ़ान होठों पर तबस्सुम चाहिए,
ज़िंदगी में दर्द का भी इक तरन्नुम चाहिए।।
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कश्तियों में छेद करना सीख ले इनसे कोई,
कौन है ये लोग इनको क्यों तलातुम चाहिए।।
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ऐ मुहब्बत ख्वाब में तारे सजाना रातभर,
गर तुझे भी सुब्ह को आँखों में क़ुल्ज़ुम चाहिए।।
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दास्तान-ए-चाक-ए-दिल मैं भी सुना तो दूं मगर,
पास में साक़ी रहे तू साथ में ख़ुम चाहिए।।
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है जरूरी लब से लब की गुफ़्तगू लेकिन कभी,
ख़ामुशी से ख़ामुशी का भी तकल्लुम चाहिए।।
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#qafas
रोहिताश"क़फ़स"
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Rohitaash Rathore
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तरन्नुम =modulation, a kind of song// तबस्सुम=smile//तलातुम=seastorm//क़ुल्ज़ुम=sea// ख़ुम=wine barrel// तकल्लुम=conversation//दास्तान-ए-चाक-ए-दिल=story of a broken heart




2.ग़ज़ल/gazal
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कहाँ आसान किश्तों में ये रंजोग़म निकलता है,
तुम्हारा ज़िक्र भी हो तो हमारा दम निकलता है।।
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जो डूबा है मुहब्बत में उसे क्या फ़िक्र सावन की,
मुहब्बत में तो इक जैसा हर इक मौसम निकलता है।।
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भला कैसे ये मुमकिन है वो बिक जाएगा चाँदी में,
ज़मी जिस पर वो क़ाबिज़ है वहाँ नीलम निकलता है।।
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तुम्हारे बाद तो ये ईद भी जैसे मोहर्रम है,
ख़ुशी के दर दरीचों से भी अब मातम निकलता है।।
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बहुत रोकर लिखें होंगे "क़फ़स" उसने वो ख़त शायद,
कोई ख़त आज भी खोलूं तो काग़ज़ नम निकलता है।।
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#qafas
रोहिताश"क़फ़स"



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3 comments:

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